शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

Hindustan main aakhir Hindu Koon hai

क्रान्तिकारी जय भीम
     दोस्तों, आजकल हिन्दू हिन्दू हिन्दू हिन्दू , आप जिधर देखो उधर हिन्दू या हिन्दुस्थान येही नाम नजर आता है ! खासकर ये जातिवादी पार्टियों कि एक बड़ी पहचान है। मगर क्या है ये हिन्दू ? कौन है ये हिन्दू ? हिन्दू शब्द कहा से आया ? कौन से धर्म ग्रन्थ में है ये हिन्दू शब्द? इस हिन्दू शब्द से किसको फायदा है ? किसको नुक्सान है ? हिन्दू होने का सबूत क्या है ? ऐसे एक से एक सवाल कई बार उठाये गए है और इसका हमें जवाब मिलने के बजाय गालिया मिली। हमें आतंकवादी कहा गया! हमें पाकिस्तानी कहा गया। आई एस आई का एजेंट कहा गया। राष्ट्रद्रोही कहा गया। और गन्दी गन्दी गालिया मिली ! तो क्या जो माँ बहनो पे गालिया देता है, आतंकवादी कहता है, राष्ट्रद्रोही कहता है, पाकिस्तानी कहता है, आई एस आई का एजेंट कहता है, किसी ख़ास राजनैतिक पार्टी से सम्बन्ध रखता है वो हिन्दू है ?

जी नहीं वो हिन्दू नहीं है। हम आपको सीना तान के बता सकते है कि इस देश में हिन्दू कोई नहीं है। कैसे ? चलो बताते है.……

इस देश के 25 करोड़ से भी ज्यादा मुसलमान हिन्दू नहीं है। लगभग 2 करोड़ क्रिस्चियन हिन्दू नहीं है। लगभग 3 करोड़ सिख हिन्दू नहीं है। यानिकी इस देश कि 30 करोड़ कि आबादी हिन्दू नहीं है।

दलित/आदिवासी हिन्दू नहीं है। अगर दलित हिन्दू होते तो उनको वेद, पुराण, रामायण और अन्य धर्मग्रन्थ पढ़ने का अधिकार होता। उनको मंदिर में जाने का अधिकार होता। पंडित बनने का अधिकार होता। वही बात आदिवासियों के बारे में भी है अगर आदिवासी लोग हिन्दू होते तो उनको भी पुरे संस्कार होते, उनको भी पढने लिखने का अधिकार होता, उपनयन का अधिकार होता , लेकिन आदिवासियों को भी ये सब अधिकार नहीं थे। इसीलिए दलित और आदिवासी लोग भी हिन्दू नहीं है। दलित और आदिवासी लोगों कि जनसँख्या लगभग 30 करोड़ तक है। यानिकी लगभग 60 करोड़ आबादी हिन्दू नहीं है।

अब बात करते है पिछड़ी जाती कि यानि कि अन्य पिछड़ी जाती (Other Backward Castes) जैसे कि यादव, अहीर, भुजबल, वन्नियार, इनकी, जिनकी आबादी लगभग 30 करोड़ तक कि अनुमानित की गयी है। इनकी संख्या ज्यादा भी हो सकती है। मगर इस देश कि जातिवादी सरकार उनकी गिनती नहीं करना चाहती है, क्यों कि अगर पिछड़ी जाती के लोगों की गिनती की जाती है तो उनको उनकी कितनी संख्या है पता चल जाएगा और मेजोरिटी होने के बावजूद उनकी भागीदारी नौकरी, मीडिया, और अन्य क्षेत्रों में कम ही है, इसीलिए उनकी जनगणना से सरकार के खिलाफ विद्रोह हो सकता है। अगर OBC लोग हिन्दू होते तो उनको भी उपनयन का अधिकार मिलता, अगर वो हिन्दू होते तो उनका भी संस्कार होता, उनके लिए बनाये गए मंडल कमीशन के लिए विरोध ना होता, अगर वो हिन्दू होते तो कोई भी ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य उनकी लड़कियो से शादी करता, लेकिन नहीं करते। इसीलिए इस देश के 30 करोड़ लोग भी हिन्दू नहीं है। यानि की 30 + 60 =90 करोड़ हिन्दू नहीं है। सुनो दोस्तों, इस देश के 90 करोड़ लोग हिन्दू नहीं है!

चलो अब बात करते है शूद्रों कि, शुद्र जैसे कि मराठा, जाट, रेड्डी, पटेल, नायर ये लोग भी मनुस्मृति के अनुसार शूद्रों को भी कोई अधिकार नहीं थे। उनको भी भगवान् को पूजने का, उपनयन का या फिर उनके साथ ऊपर कि जाती के ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य कोई सम्बन्ध नहीं बनाते थे एहा तक कि उनके साथ खाना खाना भी पाप समझा जाता था। शुद्रो और औरतों को भगवद्गीता के 9 वे अध्याय और 32वी पंक्ति में पापयोनि (Evil) कहा गया है। इसीलिए ये शुद्र और ऊँची जाती कि औरते यानि कि ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्यों कि औरते भी हिन्दू नहीं है। शूद्रों को जनसँख्या करीब 20 करोड़ तक है। इसीलिए 90 + 20 =110 करोड़ लोग हिन्दू नहीं है। इस देश के 110 करोड़ लोग हिन्दू नहीं है।

भारत देश कि जनसँख्या करीब 125 करोड़ है। यानि कि 125-110=15 करोड़ लोग है वो ही हिन्दू है। इस देश के 15 करोड़ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य ये लोग ही हिन्दू है।

मगर क्या ये 15 करोड़ लोग वाकई में हिन्दू है ? जी नहीं ! यूनिवर्सिटी ऑफ़ युताहा (University Of Utaha) के माइकल बमशाद के मुताबिक जो खुद को ऊँची जाती के मानते है वोह ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य इनका DNA मध्य एशिया के कास्पियन समंदर है वह के लोगों से 99.99% मिलता जुलता है। इसीलिए ये 15 करोड़ आबादी भी हिन्दू नहीं है।

हमने ये प्रमाणित किया कि इस देश में हिन्दू कोई नहीं है ! यही नहीं दोस्तों, हिन्दू या हिन्दुस्थान ये शब्द भारतीय संविधान के निर्माता भारतरत्न डॉ बाबासाहब आंबेडकर ने नहीं माना है। और भारतीय संविधान लिखते वक्त संविधान में हिन्दू ये शब्द नहीं डाला है। उन्होंने संविधान में इस देश का नाम इंडिया यानि कि भारत ऐसा लिखा है। हिन्दू या हिन्दूस्थान ये भारतीय संविधान के भी खिलाफ है। संविधान में बाबासाहब ने लिखा है कि, इंडिया यानि भारत एक संयुक्त राज्य होगा। उ उन्होंने जान बुझके India यानिकि भारत ऐसा इसलिए लिखा क्यों कि उनको पता था कि इस देश के कपटी शाशक (Rulerस) लोग इंडिया का ट्रांसलेशन हिन्दुस्थान करेंगे। इसीलिए बाबासाहब ने भारत ऐसा लिखा क्यों कि भारत 500 सालो से पूर्व से अस्तित्व में है। [Article 1(1) of the Indian Constitution : “India, that is Bharat, shall be a Union of States.”]

तो फिर ये हिन्दू क्या है ? हिन्दू, हिन्दुस्थान ये क्या बला है ?

दोस्तों, हिन्दू ये मुस्लमान, पर्शियन राजाओं ने जब भारत पर आक्रमण किया तब इस देश कि जनता को गुलाम बनाया। जिस अरबी आदमी कि मातृभाषा अरबी है उनको पूछा जाए कि हिन्दू का क्या मतलब है ? हिन्दू का मतलब अरबी और पर्शियन भाषा में गुलाम (Captives) ऐसा है। हिन्दू ये शब्द इस देश के किसी भी धार्मिक ग्रन्थ में, पुरानो में या स्मृतियों में नहीं पाया जाता है। जिनको ये ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य लोग हिन्दू कहते है उसका अस्सल नाम सनातन धर्म या वेदिक धर्म ऐसा है। ब्राह्मण बनिया और क्षत्रिय लोग खुदको और इस देश के सभी गैर मुसलमानो को हिन्दू इसलिए बोलती है ताकि उनका इस देश पर जो न्यायपालिका, मीडिया, सरकारी नौकरिया और अन्य क्षेत्रों में जो कब्ज़ा है वो बरकरार रखना है। हिन्दू कहने से और कहलवाने से दुश्मन दिखायी नहीं देता है, दुश्मन छुप जाता है और सम्भ्रम (Confusion) कि स्थिति बरकरार रहती है। येही सम्भ्रम कि स्थिति हजारो सालों से अभी तक बरकरार है!

Simon Commission ki puri jankari



                        क्या था साईमन कमीशन?






जब बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर विदेश से पढकर भारत में बडौदा नरेश के यहां नौकरी करने लगे तो उनके साथ बहुत ज्यादा जातिगत भेदभाव हुआ। इस कारण उन्हें 11 वें दिन ही नौकरी छोड़कर बडौदा से वापस बम्बई जाना पड़ा। उन्होंने अपने समाज को अधिकार दिलाने की बात ठान ली।
उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को बार-बार पत्र लिखकर depressed class की स्थिति से अवगत करवाया और उन्हें अधिकार देने की माँग की।



बाबा साहेब के पत्रों में वर्णित छुआछूत व भेदभाव के बारे में पढकर अंग्रेज़ दंग रह गए कि क्या एक मानव दूसरे मानव के साथ ऐसे भी पेश आ सकता है। बाबा साहेब के तथ्यों से परिपूर्ण तर्कयुक्त पत्रों से अंग्रेज़ी हुकूमत अवाक् रह गई और 1927 में depressed class की स्थिति के अध्ययन के लिए मिस्टर साईमन की अध्यक्षता में एक कमीशन का गठन किया गया।



जब कांग्रेस व मो.दा.क.चं. गांधी को कमीशन के भारत आगमन की सूचना मिली तो उन्हें लगा कि यदि यह कमीशन भारत आकर depressed class की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर लेगा तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर अंग्रेजी हुकूमत इस वर्ग के लोगों को अधिकार दे देगी। कांग्रेस व मो.दा.क.चं. गांधी ऐसा होने नहीं देने चाहते थे।





अतः 1927 में जब साईमन कमीशन अविभाजित भारत के लाहौर पहुंचा तो पूरे भारत में कांग्रेस की अगुवाई में जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन हुआ और लाहौर में मिस्टर साईमन को काले झंडे दिखा कर go back के नारे लगाए गए। बाबा साहेब स्वयं मिस्टर साईमन से मिलने लाहौर पहुंचे और उन्हें 400 पन्नों का प्रतिवेदन देकर depressed class की स्थिति से अवगत कराया। कांग्रेस ने मिस्टर साईमन की आँखों में धूल झोंकने के लिए उनके सामने ब्राह्मणों को depressed class के लोगों के साथ बैठ कर भोजन करवाया (बाद में ब्राह्मण अपने घर जाकर गोमूत्र पीकर उससे नहाये)। यह सब पाखण्ड देखकर बाबा साहेब मिस्टर साईमन को गांव के एक तालाब पर ले गये। उनके साथ एक कुत्ता भी था। वह कुत्ता अपने स्वभाव के मुताबिक सबके सामने उस तालाब में डुबकी लगाकर नहा कर बाहर आया। तब बाबा साहेब ने एक depressed class के व्यक्ति को तालाब का पानी पीने के लिए कहा। उस व्यक्ति ने घबराते हुए जैसे ही पानी पीया, आसपास के ब्राह्मणों ने हमला बोल दिया। 




आखिरकार बाबा साहेब सहित अन्य व्यक्तियों को पास की एक मुस्लिम बस्ती में शरण लेकर अपना बचाव करना पड़ा। मिस्टर साईमन को सब कुछ समझ में आ गया। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को वस्तु स्थिति रिपोर्ट सौंप दी। बाबा साहेब भी बार-बार पत्राचार करते रहे और उन्होंने लंदन जाकर अंग्रेजी हुकूमत के वरिष्ठ अधिकारियों व राजनेताओं को बार-बार भारत की depressed class को अधिकार देने की मांग की।




बाबा साहेब के तर्कों को अंग्रेजी हुकूमत नकार नहीं सकी और उसने भारत की depressed class को अधिकार देने के लिए 1930 में communal award (संप्रदायिक पंचाट) पारित किया।



हमें विद्यालय में यह पढाया गया था कि कांग्रेस ने साईमन कमीशन को काले झंडे दिखा कर go back के नारे लगाए। परंतु उसने वास्तव में ऐसा क्यों किया, यह नहीं पढाया गया।


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बुधवार, 2 नवंबर 2016

Daliton Ki History jeevan kaise jeete the puri jankari

*आओ जाने और समझे, संविधान से पहले*
*हमारे बाप दादा और हमारी पीढियां कहाँ, कैसे और किन हालातों में रहते थे*
= = = = = = = = = = = = = = = =
*1 :* हम लोग कच्चे घरों में, तम्बूओं में,
झोपडियो में अमीरों की हदों
से हट कर गांव से बाहर तालाब किनारे रहते थे।
*2 :*  धर्म प्रथा, जाति प्रथा,
सति प्रथा,
छूत प्रथा, रीति रिवाज,
संस्कृति,
परंपराओं और अमीरों के अपने ही बनाए गए कायदे कानून के तहत हम गुलाम थे
*3 :*  अच्छा खाना, अच्छा पहनना, बडे लोगों की बराबरी करना, अपने हक के
लिए लडना, और पढाई करने का हमें कोई भी हक नहीं था।
4 : हमारे वैद्य ( डाक्टर ),धर्म गुरु और हमारी पंचायतें भी अलग होती थी।
*5 :*  अमीर - गरीब, छोटे - बडे, ऊंच - नीच , और
जातिवाद की दीवारें होती
थी।
*6 :*  हम औरों के टुकडों पर पलने वाले थे।
*7 :*  हमारा अपना कुछ भी वजूद नहीं था।
*8 :*  समाज में हमारा आदर,मान , सम्मान,इज्जत,
नाम और पहचान कुछ भी नहीं था।
*9 :* हमें मनहूस समझा जाता था।
*10 :* हमारी औरतों से मनचाही मनमानी
और बदसलूकीया की जाती
थी।
*11 :* हमें गुलाम बना कर खरीदा और बेचा जाता था।
*12 :*  हमें हदों और पाबंदियों में रखा जाता था।
*13 :*  जाति और धर्म के नाम पर हमें आपस में ही लडाया जाता था।
*14 :*  हमारे पास किसी भी प्रकार का कोई भी अधिकार नहीं था।
*15 :*  कुछ भी करने से पहले हमें इजाजत लेनी
होती थी।
*16 :*  ऊंची आवाज  में बोलना, आंखें उठाना, और
ऊंचा सिर उठाना हमारे लिये
वर्जित था , पाप था।
*17 :*  हमारी एकता के संगठनों को विद्रोही बताकर दण्डित किया जाता था।
*18 :*  अपने मतलब के लिए हमें मोहरा बनाया जाता था।
*19 :* हम कमजोर, लाचार, असहाय,अनपढ,
गरीब , बे-घर और बे- सहारा थे।
*20 :* हमें दलिदरों में गिना जाता था।
*21 :* कोई भी हम से दोस्ती या रिश्तेदारी बनाना पसंद नहीं करता था।
*22 :*  हमें नीच और तुच्छ समझा जाता था।
*23 :*  हमें बड़े लोगों की गंदगी साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
*24 :* बिना वजह हमें दोषी करार देकर सजायें दी जाती थी।
*25 :*  कठपुतलियों की तरह हमें नचाया जाता था।
*26 :* अत्याचार, अन्याय, शोषण और जुल्म सहना हमारी आदत थी।
*27 :* हमारी कहीं भी कोई सुनवाई नहीं होती थी।
*28 :* हम दर-ब-दर भटकने के लिए मजबूर थे।
*29 :*  मौत और नरक से भी बदतर थी हमारी
जिन्दगियां , हमारे घर और हमारे परिवार ।
*30 :*  जहां जीवन में आशा की कोई भी किरण नहीं थी।
*31:* जहाँ हम गुलामी का
जीवन जीते थे।
*32 :* हमें गले में हांडी और पीछे झाड़ू बांधकर चलना होता था ताकि हम जमीन पर न थूकें और हमारे पैरों के अछूत निशान जमीन पर न बचें ।
*33 :* हम दोपहर के अलावा अपने दड़बों से बाहर नहीं निकल सकते थे ।ताकि हमारी परछाई किसी सवर्ण के ऊपर न पड़े ।
*34 :* दोपहर में बर्तन बजाते हुए ही घरों से बाहर निकल सकते थे ।
*35 :* हमारा कृषि करना और आखेट करने पर पाबन्दी थी ।केवल मुर्दा मवेशी का ही मांस खा सकते थे ।
*36 :* हम नया कपड़ा नहीं पहन सकते थे।
*37 :* हम मानव द्वारा प्रयोग किए जाने वाले तालाब से पानी नहीं पी सकते थे ।पी लेने पर जिह्वा काट देने या मृत्यु दण्ड दिया जाता था ।
*38 :* हमारे पूर्वज जानवरों के तालाब से ही पानी पी सकते थे।
*38 :* यदि हम किसी से छू जाते अथवा दिखाई दे जाते तो दंडित किया जाता था।और वह सवर्ण गौ मूत्र से नहाता था।
*39 :* हमें जानवरों से भी बदतर समझा जाता था।
*40 :* जब बारिश नहीं होती थी तो *तथाकथित इन्द्र देवता* को प्रसन्न करने के लिए जगह जगह हमारे पूर्वजों की *बलि* दी जाती थी।
*42 :* हमारे पूर्वजों की पहली सन्तान को पैदा होते ही गंगा नदी में फेंक कर बहा देना होता था ।
*43 :* हमारे परिवार की बेटियों को मन्दिर को दान में देना पड़ता था जो *देव दासी* कहलाती थी ।उनसे पैदा अवैध सन्तान को *हरिजन* कहते है।
*44 :* कोई ब्रिज अथवा भवन बनाते समय चरक प्रथा के नाम पर हमारे पूर्वजों की बलि देकर नींव में दफन किया जाता था।
*45 :* हमारी माता बहनों को ऊपरी अंग ढकने पर पाबन्दी थी ।
*46 :* ब्राह्मणी रियासत *त्रावणकोर* में यह प्रथा अंग्रेज़ी शासनकाल में भी समाप्त करने के लिए तैयार नहीं थे।जिसके लिए जद्दोजहद करना पड़ा।
*47 :* अच्छूत कहकर महामारी में भी  हमारा इलाज नहीं हो पाने के कारण , तड़प - तड़पकर मरते थे हम लोग ।
*48 :* दो रोटी और कपड़ा के लिए कोल्हू के बैल की तरह काम लिया जाता था हमारे पूर्वजों से।
*49 :*यह सब पाबंदी के नियम हमारे ऊपर यूरेशियन ब्राह्मणों के उन पूर्वजों ने लगा रखे थे *जिन्हें आज हम देवी देवता मानकर पूजते हैं*
*50 :*आज भी ब्राह्मण *जन्म कुण्डली* में हमें *राक्षस , दानव ,दाना ,दैत्य या असुर*ही लिखता है ।
और स्वयं को *" श्रेष्ठ"* मानते हुए *देव या देवता* लिखता है ।
😡= = = = = = = = = = = = 😡

*51 : अपने पूर्वजों की दुर्गति जानकर भी आप इन्हें अपना देवी - देवता मानकर पूजना पसंद करते हैं ,इसे क्या कहें , अज्ञानता या ............?*

😡== = = = = = = = = = = 😡

ऐसा था हमारे बाप दादाओं का
बीता हुआ
कल...

6, 7, 8 और 9 तारीख से महासंयोग, इन 8 राशि के लोगों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी

1.मेष राशि, वृष राशि, कन्या राशि, कर्क राशि 6, 7, 8 और 9 तारीख से महासंयोग बन रहा है। जिसके कारण आपके जीवन में आपको अनेक प्रकार के बड़े बड़...