बुधवार, 2 नवंबर 2016

Daliton Ki History jeevan kaise jeete the puri jankari

*आओ जाने और समझे, संविधान से पहले*
*हमारे बाप दादा और हमारी पीढियां कहाँ, कैसे और किन हालातों में रहते थे*
= = = = = = = = = = = = = = = =
*1 :* हम लोग कच्चे घरों में, तम्बूओं में,
झोपडियो में अमीरों की हदों
से हट कर गांव से बाहर तालाब किनारे रहते थे।
*2 :*  धर्म प्रथा, जाति प्रथा,
सति प्रथा,
छूत प्रथा, रीति रिवाज,
संस्कृति,
परंपराओं और अमीरों के अपने ही बनाए गए कायदे कानून के तहत हम गुलाम थे
*3 :*  अच्छा खाना, अच्छा पहनना, बडे लोगों की बराबरी करना, अपने हक के
लिए लडना, और पढाई करने का हमें कोई भी हक नहीं था।
4 : हमारे वैद्य ( डाक्टर ),धर्म गुरु और हमारी पंचायतें भी अलग होती थी।
*5 :*  अमीर - गरीब, छोटे - बडे, ऊंच - नीच , और
जातिवाद की दीवारें होती
थी।
*6 :*  हम औरों के टुकडों पर पलने वाले थे।
*7 :*  हमारा अपना कुछ भी वजूद नहीं था।
*8 :*  समाज में हमारा आदर,मान , सम्मान,इज्जत,
नाम और पहचान कुछ भी नहीं था।
*9 :* हमें मनहूस समझा जाता था।
*10 :* हमारी औरतों से मनचाही मनमानी
और बदसलूकीया की जाती
थी।
*11 :* हमें गुलाम बना कर खरीदा और बेचा जाता था।
*12 :*  हमें हदों और पाबंदियों में रखा जाता था।
*13 :*  जाति और धर्म के नाम पर हमें आपस में ही लडाया जाता था।
*14 :*  हमारे पास किसी भी प्रकार का कोई भी अधिकार नहीं था।
*15 :*  कुछ भी करने से पहले हमें इजाजत लेनी
होती थी।
*16 :*  ऊंची आवाज  में बोलना, आंखें उठाना, और
ऊंचा सिर उठाना हमारे लिये
वर्जित था , पाप था।
*17 :*  हमारी एकता के संगठनों को विद्रोही बताकर दण्डित किया जाता था।
*18 :*  अपने मतलब के लिए हमें मोहरा बनाया जाता था।
*19 :* हम कमजोर, लाचार, असहाय,अनपढ,
गरीब , बे-घर और बे- सहारा थे।
*20 :* हमें दलिदरों में गिना जाता था।
*21 :* कोई भी हम से दोस्ती या रिश्तेदारी बनाना पसंद नहीं करता था।
*22 :*  हमें नीच और तुच्छ समझा जाता था।
*23 :*  हमें बड़े लोगों की गंदगी साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
*24 :* बिना वजह हमें दोषी करार देकर सजायें दी जाती थी।
*25 :*  कठपुतलियों की तरह हमें नचाया जाता था।
*26 :* अत्याचार, अन्याय, शोषण और जुल्म सहना हमारी आदत थी।
*27 :* हमारी कहीं भी कोई सुनवाई नहीं होती थी।
*28 :* हम दर-ब-दर भटकने के लिए मजबूर थे।
*29 :*  मौत और नरक से भी बदतर थी हमारी
जिन्दगियां , हमारे घर और हमारे परिवार ।
*30 :*  जहां जीवन में आशा की कोई भी किरण नहीं थी।
*31:* जहाँ हम गुलामी का
जीवन जीते थे।
*32 :* हमें गले में हांडी और पीछे झाड़ू बांधकर चलना होता था ताकि हम जमीन पर न थूकें और हमारे पैरों के अछूत निशान जमीन पर न बचें ।
*33 :* हम दोपहर के अलावा अपने दड़बों से बाहर नहीं निकल सकते थे ।ताकि हमारी परछाई किसी सवर्ण के ऊपर न पड़े ।
*34 :* दोपहर में बर्तन बजाते हुए ही घरों से बाहर निकल सकते थे ।
*35 :* हमारा कृषि करना और आखेट करने पर पाबन्दी थी ।केवल मुर्दा मवेशी का ही मांस खा सकते थे ।
*36 :* हम नया कपड़ा नहीं पहन सकते थे।
*37 :* हम मानव द्वारा प्रयोग किए जाने वाले तालाब से पानी नहीं पी सकते थे ।पी लेने पर जिह्वा काट देने या मृत्यु दण्ड दिया जाता था ।
*38 :* हमारे पूर्वज जानवरों के तालाब से ही पानी पी सकते थे।
*38 :* यदि हम किसी से छू जाते अथवा दिखाई दे जाते तो दंडित किया जाता था।और वह सवर्ण गौ मूत्र से नहाता था।
*39 :* हमें जानवरों से भी बदतर समझा जाता था।
*40 :* जब बारिश नहीं होती थी तो *तथाकथित इन्द्र देवता* को प्रसन्न करने के लिए जगह जगह हमारे पूर्वजों की *बलि* दी जाती थी।
*42 :* हमारे पूर्वजों की पहली सन्तान को पैदा होते ही गंगा नदी में फेंक कर बहा देना होता था ।
*43 :* हमारे परिवार की बेटियों को मन्दिर को दान में देना पड़ता था जो *देव दासी* कहलाती थी ।उनसे पैदा अवैध सन्तान को *हरिजन* कहते है।
*44 :* कोई ब्रिज अथवा भवन बनाते समय चरक प्रथा के नाम पर हमारे पूर्वजों की बलि देकर नींव में दफन किया जाता था।
*45 :* हमारी माता बहनों को ऊपरी अंग ढकने पर पाबन्दी थी ।
*46 :* ब्राह्मणी रियासत *त्रावणकोर* में यह प्रथा अंग्रेज़ी शासनकाल में भी समाप्त करने के लिए तैयार नहीं थे।जिसके लिए जद्दोजहद करना पड़ा।
*47 :* अच्छूत कहकर महामारी में भी  हमारा इलाज नहीं हो पाने के कारण , तड़प - तड़पकर मरते थे हम लोग ।
*48 :* दो रोटी और कपड़ा के लिए कोल्हू के बैल की तरह काम लिया जाता था हमारे पूर्वजों से।
*49 :*यह सब पाबंदी के नियम हमारे ऊपर यूरेशियन ब्राह्मणों के उन पूर्वजों ने लगा रखे थे *जिन्हें आज हम देवी देवता मानकर पूजते हैं*
*50 :*आज भी ब्राह्मण *जन्म कुण्डली* में हमें *राक्षस , दानव ,दाना ,दैत्य या असुर*ही लिखता है ।
और स्वयं को *" श्रेष्ठ"* मानते हुए *देव या देवता* लिखता है ।
😡= = = = = = = = = = = = 😡

*51 : अपने पूर्वजों की दुर्गति जानकर भी आप इन्हें अपना देवी - देवता मानकर पूजना पसंद करते हैं ,इसे क्या कहें , अज्ञानता या ............?*

😡== = = = = = = = = = = 😡

ऐसा था हमारे बाप दादाओं का
बीता हुआ
कल...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

6, 7, 8 और 9 तारीख से महासंयोग, इन 8 राशि के लोगों को मिलेगी बड़ी खुशखबरी

1.मेष राशि, वृष राशि, कन्या राशि, कर्क राशि 6, 7, 8 और 9 तारीख से महासंयोग बन रहा है। जिसके कारण आपके जीवन में आपको अनेक प्रकार के बड़े बड़...