करोगे याद एक दिन साथ बिताये जमाने को,चले जायेंगे जिस दिन हम कभी वापस न आने को।
करेगा महफिल में जिक्र हमारा कोई तो,चले जाओगे तन्हाई में आंसू बहाने को।
लफ्ज़ अल्फाज़ कागज़ और किताब,
कहाँ कहाँ नहीं रखता मैं तेरी यादों का हिसाब।
बहुत ज़ालिम निगाहें हैं इन्हें मासूम मत समझो,
अगर तफ़्तीश हो जाये हज़ारों क़त्ल निकलेंगे।

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थोड़ी सी इबादत बहुत बढ़ा सिला देती है,गुलाब की तरह चेहरा खिला देती है।
अल्लाह की याद को दिल से जाने ना देना,कभी छोटी सी दुआ अर्श हिला देती है।
नहीं मायूस मैं अपने खुदा से,बदल जाती है किस्मत भी दुआ से।

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उम्र की राह मे रास्ते बदल जाते हैं, वक़्त की आँधी मे इंसान बदल जाते हैं.
सोचते हैं आपको इतना याद ना करें, लेकिन आँख बंद करते ही इरादे बदल जाते है.
अपनी ज़िन्दगी की तो अजीब ही कहानी है,जिस चीज की चाह है वो ही बेगानी है,
हम हँसते भी हैंं तो दुनिया को हँसाने के लिए,वरना दुनिया डूब जाये,एन आँखों में इतना पानी है
फूल खिलते हैं, बहारों का समा होता है,ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है,
दिल की बातों को होंठों से नहीं कहते,ये फसाना तो निगाहों से बयां होता है।
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