रविवार, 30 सितंबर 2018

पत्थर की पूजा कर बैठे हम अनजान थे, तुम्हारी हर आदत और बेवफाई से नादान थे,

अब तो गम सहने की आदत सी हो गई है,
रात को छुप छुप के रोने की आदत सी हो गई है,
तू बेवफा है खेल मेरे दिल से जी भर के हमें तो, अब चोट खाने की आदत सी हो गई है।

सितारों को रोशनी की क्या जरूरत, ये तो खुद को जला लेते हैं, आशिकों को वफा की क्या जरूरत, वह तो बेवफा तो भी प्यार कर लेते हैं।।

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सिख लो... वरना हसीन चेहरे तो एक ढूंढो लाखों मिलेंगे, पर हर एक में वफादारी की फितरत नहीं होती..

पत्थर की पूजा कर बैठे हम अनजान थे,
तुम्हारी हर आदत और बेवफाई से नादान थे,
तुम्हीं ने बना दिया हमें बेजान मूर्ति वरना हम भी पहले किसी महफिल की जानते थे।।

बेवफा वह नहीं शायद हम ही खराब थे,
जहर की जरूरत नहीं हम मर जाएंगे शराब से,
कांटो का दर्द तो हमें महसूस नहीं हुआ,
शायद बेपनाह प्यार था हमें उस नाजुक गुलाब से।।

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