रविवार, 30 सितंबर 2018

आरजू थी कि तेरी बाहों में, दम निकले, लेकिन बेवफा तुम नहीं बदनसीब हम निकले।।

आरजू थी कि तेरी बाहों में, दम निकले,
लेकिन बेवफा तुम नहीं बदनसीब हम निकले।।

कभी किसी मुसाफिर से प्यार न करना,
उनका ठिकाना बहुत दूर होता है,
वो कभी बेवफा नहीं होते,
मगर उनका जाना जरूर होता है।।

वफा के नाम से वो अनजान थे!
किसी की बेवफाई से शायद परेशान थे!
हमने वफ़ा देनी चाही तो पता चला!
हम खुद बेवफा के नाम से बदनाम थे।।

वह हमसफ़र कैसे थे जो सफर छोड़ गए,
बिना कसूर प्यार का रिश्ता तोड़ गए,
वह कभी हमें याद करते नहीं,
और खुद की यादों में हमको तड़पता छोड़ गए।।

कर के वादा प्यार का वो मुकर गया,
एक छोटे से तूफान से वो कितना दूर चला गया,
हमें नहीं पता यह कैसी मजबूरी थी उनकी,
या फिर इस प्यारे खिलौने से दिल भर गया।।

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