तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता,
दोनों ही किसी की खुशी के लिए खुद को तोड़ लेते हैं।।
जख्म ऐसा दिया कोई दवा काम न आई,
आग ऐसी लगी कि पानी से भी भूल न पायी,
आज भी रोते हैं उनकी यादों में..
जिन्हें हमारी याद आज तक नहीं आईं।।
कैसे इस दिल से तुझे भुला दे हम
तेरे नाम की लय तो धड़के नहीं चलती है।।
वजह पूछ मत मेरे रोने की,
तेरी मुस्कुराहट पे खुशी के दो आंसू गिर गए।।
कितना खुशनुमा होगा मेरे इंतजार का मंजर भी,
जब ठुकराने वाले मुझे फिर से पाने के लिए आंसू बहाएंगे।।
मजबूरी क्या है उन्होंने बताई तो होती,
जुदाई की बात यू सुनाई नहीं होती,
कब्र की मिट्टी भी दे देते उन्हें,
मेरे मौत की ख्वाहिश तो जताई ना होती।।
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