सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

मेरे वजूद में काश तू उतर जाए, मैं देखूं आईना और तू नजर आए

कुछ उलझे सवालों से डरता है दिल,
जाने क्यों तन्हाई में बिखरता है दिल,
किसी को पाने की अब कोई चाहत ना रही,
बस कुछ अपनों को खोने से डरता है दिल।।

जब खामोश आंखो से बात होती है,
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,
तुम्हारे ही ख्यालों में खोए रहते हैं,
पता नहीं कब दिन और कब रात होती है।।

मुस्कुराते पलको पे सनम चले आते हैं,
आप क्या जाने कहां से हमारे गम आते हैं,
आज भी उस मोड़ पर खड़े हैं,
जहां किसी ने कहा था कि ठहरो हम अभी आते हैं।।

मेरे वजूद में काश तू उतर जाए,
मैं देखूं आईना और तू नजर आए,
तू हो सामने और वक्त ठहर जाए,
ये जिंदगी तुझे यूं ही देखते हुए गुजर जाए।।

सुहाना मौसम और हवा में नमी होगी,
आंसुओं की बहती नदी होगी,
मिलना तो हम तब भी चाहेंगे आपसे,
जब आपके पास वक्त और हमारे पास सासों की कमी होगी।।

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