मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

रुलाने से पहले एक बार हंसाया तो होता, कसूर क्या है इस दिल को बताया तो होता

मेरी तन्हाई का मुझे गिला नहीं,
क्या हुआ जब कोई मिला नहीं,
फिर भी दुआ करेंगे आपके लिए,
आपको वो सब मिले जो हमें मिला नहीं।।

मैंने पूछा अपने खुदा से,
तू मेरी दुआ उसी वक्त क्यों नहीं सुनता,
उसने मुस्कुराकर कहा,
मैं तो तेरे गुनाहों की सजा भी उसी वक्त नहीं देता।।

रुलाने से पहले एक बार हंसाया तो होता,
कसूर क्या है इस दिल को बताया तो होता,
मिली सजा उस खता की जो ना कि कभी हमने,
काश यह दिल कभी कहीं लगाया न होता।।

हमें आंसू से जख्मों को धोना नहीं आता,
मिलती हैं खुशी तो उसे खोना नहीं आता,
सह लेते हैं हर गम हंसके,
लोग कहते हैं हमें रोना नहीं आता।।

गमों में हुस्न वालों को रुलाया नहीं जाता,
लहरों से पानी को हटाया नहीं जाता,
बनने वाले बन जाते हैं अपने,
किसी को कहकर अपना बनाया नहीं जाता।।

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