शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

पानी  की  बूंदे  फूलों  को  भीगा  रही  है, ठंडी  लहरें  एक  ताज़गी  जग  रही  है,

नमस्कार !
जाग   जाओ  बालक !!
सूर्य  का  उदय  हो  चूका  है ,
नित्य  क्रम  से  निविर्त होक ..
पवित्र  स्नान  पूर्ण  करलो  और ,
मित्रो  को  सन्देश  भेजे ,
फिर  बाद  में  थोड़ा  अल्पाहार  कर  ले।।

ना  किसी  के  "अभाव " में  जियो ,
ना  किसी  के  "प्रभाव " में  जियो ,
ज़िंदगी  आपकी  है ,
बस  अपने  मस्त  "स्वभाव " में  जियो।।

पानी  की  बूंदे  फूलों  को  भीगा  रही  है,
ठंडी  लहरें  एक  ताज़गी  जग  रही  है,
हो  जाइये  आप  भी  इनमे  शामिल,
एक  प्यारी  सी  सुबह  आपको  जग  रही  है।

मीठी  सी  नींद  के  मीठे  ख्वाब  में  हो  गया  सवेरा ,
अब  तो  जागिये  जनाब  चाँद  भी  चुप  गया ,
फिर  रात  के  इंतज़ार  में  १  नया  दिन  शुरू  करो ,
अपनी  मंज़िल  की  तलसश  में।।

रात  ने  चद्दर  समेत  ली  है ,
सूरज  ने  भी  किरणे  बिखेर  दी  है ,
चलो  उठ  जाओ  और  थैंक्स  करो ,
अपने  भगवान  को ,
जिसने  हमें  ये  प्यारी  सी  सुबह  दी  है।।

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