कौन है यहां जो अब हम मुझपे एतबार करता है,
मेरा अक्स मुझे पहचानने से इंकार करता है,
खंजर लिए हाथों में खड़ा है दर्द मेरा,
वो मेरे क़त्ल के लिए इंतजार करता है।।
जान से भी ज्यादा उन्हें प्यार करते थे,
याद उन्हें दिन रात किया करते थे,
अब उन राहों से गुजरा नहीं जाता,
जहां बैठकर उनका इंतजार किया करते थे।।
कौन कहता है इश्क में बस इकरार होता है,
कौन कहता है इसमें बस इंकार होता है,
तन्हाई को तुम बेबसी का नाम ना दो,
क्योंकि इसका दूसरा नाम ही इंतजार होता है।।
मैं इंतजार में हूं कि कब टूटेगी तेरी खामोशी,
तुम इंतजार में हो कि नहीं देख मेरी खामोशी,
दर्द उठता है दिल में सुर लहर की तरह,
मैं किस तरह बयां करूं रोती हुई खामोशी।।
जिंदगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए,
जब यह देखा तो घबरा गए आ गए हम कहां आ गए।।
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