सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

रात में चादर समेट ली है, सूरज ने कितने बिखेर दी है चलो उठो और थैंक्स करो भगवान को

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पानी की बूंदे फूलों को भी गा रही है,
ठंडी लहरें ताजगी जगा रही है,
हो जाए आप भी इनमें शामिल एक प्यारी सी सुबह आपको जगा रही है।।

फिर उम्मीद भरी सुबह आई है,
सूरज को साथ लाई है,
हमारी दोस्ती का यह असर तो देखो,
की हवाएं अभी आपको गुड मॉर्निंग कहने आई है।

फूल अमृत का जाम भेजा है,
सूरज ने गगन से सलाम भेजा है,
मुबारक हो आपको नई सुबह,
तहे दिल से हमने यह पैगाम भेजा है।।

बिन सावन बरसात नहीं होती,
डूबे बिना रात नहीं होती, क्या करें
अब ऐसी हालत है, आपकी याद आए बिना दिन की शुरुआत नहीं होती।।

रात के बाद सुबह को आना ही था,
गम के बाद खुशी को आना ही था,
क्या हुआ अगर हम देर तक सोए रहे,
पर हमारा गुड मॉर्निंग मैसेज तो आना ही था।।

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