शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

वक़्त नहीं बदलता है अपनों के साथ, बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ

मैंने ज़िंदगी से पुछा कि तू इतनी कठिन क्यों है?
ज़िंदगी ने हंसकर कहा, "दुनियां आसान चीज़ों की कद्र नहीं करती"।।

वक़्त बदलता है ज़िंदगी के साथ;
ज़िंदगी बदलती है वक़्त के साथ;
वक़्त नहीं बदलता है अपनों के साथ;
बस अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ।।

कोई नहीं होता हमेशा के लिए किसी का;
लिखा है साथ थोड़ा-थोड़ा सभी का;
मत बनाओ किसी को अपने जीने की वजह;
क्योंकि जीना है अकेले, यह असूल है ज़िंदगी का।।

हँसना ज़िंदगी है;
हँस कर गम भुलाना ज़िंदगी है;
जीत कर हँसे तो क्या हँसे;
हार कर ख़ुशियाँ मनाना ज़िंदगी है।।

मरता नहीं कोई किसी के बगैर ये हकीकत है जिंदगी की; लेकिन सिर्फ साँसें लेने को 'जीना' तो नहीं कहते।

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