अपनों को दूर होते देखा,
सपनों को चूर होते देखा,
अरे लोग कहते हैं कि फूल कभी नहीं रोते,
हमने फूलों को भी तन्हाई में रोते देखा।।
हम क्यों गम करें,
अगर वह हमें ना मिले,
अरे गम तो वो करें,
जिसे हम ना मिले।।
मौसम को मौसम की बहार ने लूटा,
हमें किसी ने नहीं किनारों ने लूटा,
आप तो डर गए मेरी एक कसम से,
आप की कसम देकर हमें हजारों ने लूटा।।
चांद ने की होगी सूरज से मोहब्बत,
इसलिए तो चांद में दाग है,
मुमकिन है चांद से हुई होगी बेवफाई,
इसलिए तो सूरज में आग है।।
कितना भी चाहो ना भूल पाओगे,
हमसे कितना भी दूर जाओ नज़दीक पाओगे,
हमें मिटा सकते हो तो मिटा दो, मगर
मेरी यादों को क्या सपनों से जुदा कर पाओगे।।
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