शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

हम राज कुमार है जानी हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते, आंख ही चुरा लेते हैं

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।

खाओ, पिओ, खुश रहो, शादी की सालगिरह आई है;
कितनी खूबसूरत से तुम दोनों ने, अपनी हसीन दुनिया बनाई है। शादी की सालगिराह मुबारक हो।

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।

उसे  बारिश  पसंद  थी , मुझे  बारिश  में  वो ..
उसे  हसना  पसंद  था , मुझे  हस्ते  हुए  वो ..
उसे  चुप  रहना  पसंद  था , मुझे  बोलते  हुए  वो ..
उसे  सब  कुछ  पसंद  था , और  मुझे  सिर्फ  वो ..

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