अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।
खाओ, पिओ, खुश रहो, शादी की सालगिरह आई है;
कितनी खूबसूरत से तुम दोनों ने, अपनी हसीन दुनिया बनाई है। शादी की सालगिराह मुबारक हो।
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे।
उसे बारिश पसंद थी , मुझे बारिश में वो ..
उसे हसना पसंद था , मुझे हस्ते हुए वो ..
उसे चुप रहना पसंद था , मुझे बोलते हुए वो ..
उसे सब कुछ पसंद था , और मुझे सिर्फ वो ..
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