मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

क्या लिखूं दिल की हकीकत आरजू बेहोश है, खत पर है आंसू गिरे और कलम खामोश है

क्या लिखूं दिल की हकीकत आरजू बेहोश है,
खत पर है आंसू गिरे और कलम खामोश है।।

जमाने से न पूछो हाल-ए-दिल,
आंसू बयां करते हैं जख्मों की गहराई।।

जरा सी बात देर तक रुलाती रही,
खुशी में भी आंख आंसू बहाती रही,
कोई खोके मिला तो कोई मिल के खो गया,
जिंदगी हम को बस ऐसे ही आजमाती रही।।

जिन्हें सलीका है गम समझने का उन्हीं के रोने में आंसू नजर नहीं आते,
खुशी की आंख में आंसू की भी जगह रखना,
बुरे जमाने कभी पूछकर नहीं आते।।

जिसकी किस्मत में लिखा हो रोना दोस्तों,
वो मुस्कुरा भी दे तो आंसू निकल आते हैं।।

डूब जाते हैं उम्मीदों के सफीने इसमें,
मैं नहीं मानती आंसू जरा सा पानी है।।

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