शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

पूनम की रात में चांद बदल जाता है, वक्त के साथ इंसान बदल जाता है,

पत्थर क्यों मारते हो, पत्थर क्यों मारते हो,
पूरा पहाड़ ही मार दो, हम यूं ही मर जाएंगे,
बस एक बार आंख मार दो।।

पलकों पर अपनी बिठाया है,
तुम्हें बड़ी दुआओं के बाद पाया है तुम्हें,
आसानी से नहीं मिले हो तुम,
नेशनल पार्क से चुराया है तुम्हें।।

पहली नजर में लगा वह मेरी है,
आंखें उसकी झील से भी गहरी है,
प्रपोज कर कर के थक गया,
तब जाकर जाना कि वह वह दी है।।

पूनम की रात में चांद बदल जाता है,
वक्त के साथ इंसान बदल जाता है,
सोचते हैं कि आपको तंग ना करें,
मगर सोचते-सोचते प्लान बदल जाता है।।

प्यार न रहे तो वफा कौन करेगा,
दोस्त ना रहे तो दोस्ती कौन करेगा,
खुद सलामत रखें तुम्हें वरना,
बंदर की तरह उछल कूद कौन करेगा।।

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