सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

वो रात दर्द और सितम की रात होगी, जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी

वो रात दर्द और सितम की रात होगी,
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी,
उठ जाता हूं मैं ये सोचकर नींद से अक्सर,
एक गैरों की बाहों में मेरी सारी कयानात होगी।।

दिल पर क्या गुजरी वो अनजान क्या जाने,
प्यार किसे कहते हैं वह नादान क्या जाने,
हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का,
कैसे बना था घोसला वो तूफान क्या जाने।।

मोहब्बत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है,
और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं,
उनको हमारा यह पैगाम है,
वादा-ए- वफ़ा करो तो फिर खुद को फना करो,
वरना खुद के लिए किसी की जिंदगी तबाह ना करो।।

तू चांद मैं सितारा होता,
आसमान के एक आशियाने में,
एक आशियाना हमारा होता,
लोग तुम्हे दूर से ही देखते नजदीक से देखने का हक बस हमारा होता।।

शायर तो हम हैं शायरी बना देंगे,
आपको शायरी में कैद कर लेंगे,
कभी सुनाओ हमें अपनी आवाज,
आपकी आवाज को हम गजल बना देंगे।।

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