मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

दरिया वफाओं का कभी नहीं रुकता, मोहब्बत में इंसान झुकता नहीं

कुछ बीते हुए लम्हों से मुलाकात हुई,
कुछ टूटे हुए सपनों से बात हुई,
याद जो करने बैठे तमाम यादों को,
आपकी यादों से शुरुआत हुई।।

खुदा ने मुझसे कहा इश्क ना कर तू दीवाना हो जाएगा,
मैंने कहा ए खुदा तू मैसेज पढ़ने वाले से तो मिल,
तुझे भी इश्क हो जाएगा।।

जीते थे हम भी शान से,
महक उठी थी फिजा किसी के नाम से,
जमाने में गुजरे हैं हम भी कुछ ऐसे मुकाम से,
कि नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से।।

तेरे बिन कैसे मेरी गुजरेगी यह रातें,
तन्हाई का गम कैसे सहेगी ये रातें,
बहुत लंबी है ये घड़ियां इंतजार की,
करवट बदल बदल कर कटेगी ये रातें।।

दरिया वफाओं का कभी नहीं रुकता,
मोहब्बत में इंसान झुकता नहीं,
हम चुप हैं किसी की खुशी के लिए,
और वह सोचते हैं दिल हमारा दुखता नहीं।।

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