हर पल नजर उनको देखना चाहे तो आंखों का क्या कसूर,
हर पल उनकी याद आए तो सांसों का क्या कसूर,
वैसे तो सपने पूछकर नहीं आते,
पर सपने उनके ही आए तो रातों का क्या कसूर।।
होंठ सह नहीं सकते जो फ़साना दिल का,
शायद नजरों वो बात हो जाए,
इस उम्मीद में करते हैं इंतजार,
कि शायद सपने मे मुलाकात हो जाए।।
आंसू को कभी उसका कतरा ना समझना,
ऐसा तुम्हें चाहत का समंदर ना मिलेगा,
करोगे याद एक दिन प्यार के जमाने को,
चले जाएंगे जब हम वापस ना आने को,
चलेगा जब महफिल में ज़िक्र हमारा,
तो तुम भी तन्हाई ढूंढोगे आंसू बहाने को।।
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