शनिवार, 6 अक्टूबर 2018

आवारा हवा का झोंका हूं, आ निकला हूं पल दो पल के लिए

अब हमसे इंतजार नहीं होता,
इतना महंगा तो किसी का प्यार नहीं होता,
हम जिसके लिए हुए हैं रुसवा जमाने में,
अब बात करने को भी तैयार नहीं होता।।

किसी के दीदार को तरसता है किसी के इंतजार में तड़पता है, यह दिल भी अजीब चीज है जो होता है खुद का, मगर किसी और के लिए धड़कता है।।

तेरे इंतजार का यह आलम है, तड़पता है दिल आंखों भी नम है, तेरी आरजू में जी रहे है,
वरना जीने की ख्वाहिश कम है।।

इश्क किया तुमसे मेरे एतबार की हद थी,
इश्क में दे दो जान मेरे प्यार की हद थी,
मरने के बाद भी खुली थी आंखें,
यह मेरे इंतजार की हद थी।।

एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर,
एक शाम जाती है तुम्हारी याद देकर,
पर मुझे तो उस शाम का इंतजार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर।।

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