सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

सवेरे सवेरे ही खुशियों का मेला, ना लोगों की परवाह न दुनिया का झमेला

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सवेरे सवेरे ही खुशियों का मेला,
ना लोगों की परवाह न दुनिया का झमेला,
परिंदों का शोर हो और मौसम अलबेला,
मुबारक हो आपको आज का सवेरा।।

सुबह का सूरज जिस को सलाम करें,
परिंदों की आवाज जिसको आदाब करे,
सबको सदा खुश रखने वाला वो मालिक,
हर पल आपकी खुशियों का ख्याल करें।।

सुबह सुबह एक पहला पैगाम देना है,
आपको सुबह का पहला सलाम देना है,
गुजरे सारा दिन आपका खुशियों में,
आपकी सुबह को खूबसूरत सा इनाम देना है।।

सुबह होते ही जब दुनिया आवाद होती है,
आंख खुलते ही आपकी याद साथ होती है,
खुशियों के फूल हो आप के आंचल में,
यह मेरे होठों पे पहली फ़रियाद होती है।।

हर नई सुबह का नया नजारा,
ठंडी हवा ले कर आई पैगाम हमारा,
जागो उठो तैयार हो जाओ,
खुशियों से भरा रहे आज का दिन तुम्हारा।।

हर सुबह की धूप कुछ याद दिलाती है,
हर फूल की खुशबू एक जादू जगाती है,
चाहू ना चाहू कितना भी पर,
सुबह सुबह आपकी याद आ ही जाती है।।

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